Thursday, July 28, 2011

उसकी बात-बात में छल है...


उसकी बात-बात में छल है
माया ही उसका संबल है
वह वियोग का बादल मेरा
छाया जीवन आकुल मेरा
केवल कोमल, अस्थिर नभ-सी
वह अंतिम भय-सी, विस्मय-सी
फिर भी है वह अनुपम सुंदर.......

1 comment:

  1. bharti tiwari sharmaAugust 11, 2011 at 3:25 AM

    kya bat hai semantji,thode se shabdo me bhot kuch kh dia

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