Sunday, August 7, 2011

मैं मीरां.....


मैं मीरां.....
संसार की मर्यादा के सच के बीच जीती,
अपने कृष्ण की प्रीत में ज़हर पीती,
एक अभिलाषा लिए कि एक दिन,
अपनी प्रीत में लीन हो जाऊंगी सदा के लिए
अमर बंधन के पाश में...
अपने कृष्ण को साथ लिए...
अपनी प्रीत के साथ...

2 comments:

  1. Ek Abhilasha liye....us pal ke liye

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  2. bharti tiwari sharmaAugust 9, 2011 at 1:13 AM

    meera ka prem aatmik tha islie amar hai,

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